∷其他评书 - 赵凤霞_民族英雄郑成功评书
∷网通服务器播放列表
∷电信服务器播放列表
∷铁通服务器播放列表
- [第001回]
- [第002回]
- [第003回]
- [第004回]
- [第005回]
- [第006回]
- [第007回]
- [第008回]
- [第009回]
- [第010回]
- [第011回]
- [第012回]
- [第013回]
- [第014回]
- [第015回]
- [第016回]
- [第017回]
- [第018回]
- [第019回]
- [第020回]
- [第021回]
- [第022回]
- [第023回]
- [第024回]
- [第025回]
- [第026回]
- [第027回]
- [第028回]
- [第029回]
- [第030回]
- [第031回]
- [第032回]
- [第033回]
- [第034回]
- [第035回]
- [第036回]
- [第037回]
- [第038回]
- [第039回]
- [第040回]
- [第041回]
- [第042回]
- [第043回]
- [第044回]
- [第045回]
- [第046回]
- [第047回]
- [第048回]
- [第049回]
- [第050回]
- [第051回]
- [第052回]
- [第053回]
- [第054回]
- [第055回]
- [第056回]
- [第057回]
- [第058回]
- [第059回]
- [第060回]
- [第061回]
- [第062回]
- [第063回]
- [第064回]
- [第065回]
- [第066回]
- [第067回]
- [第068回]
- [第069回]
- [第070回]
- [第071回]
- [第072回]
- [第073回]
- [第074回]
- [第075回]
- [第076回]
- [第077回]
- [第078回]
- [第079回]
- [第080回]
- [第081回]
- [第082回]
- [第083回]
- [第084回]
- [第085回]
- [第086回]
- [第087回]
- [第088回]
- [第089回]
- [第090回]
- [第091回]
- [第092回]
- [第093回]
- [第094回]
- [第095回]
- [第096回]
- [第097回]
- [第098回]
- [第099回]
- [第100回]
- [第101回]
- [第102回]
- [第103回]
- [第104回]
- [第105回]
- [第106回]
- [第107回]
- [第108回]
- [第109回]
- [第110回]
- [第111回]
- [第112回]
- [第113回]
- [第114回]
- [第115回]
- [第116回]
- [第117回]
- [第118回]
- [第119回]
- [第120回]
- [第121回]
- [第122回]
- [第123回]
- [第124回]
- [第125回]
- [第126回]
- [第127回]
- [第128回]
- [第129回]
- [第130回]
- [第131回]
- [第132回]
- [第133回]
- [第134回]
- [第135回]
- [第136回]
- [第137回]
- [第138回]
- [第139回]
- [第140回]
- [第141回]
- [第142回]
- [第143回]
- [第144回]
- [第145回]
- [第146回]
- [第147回]
- [第148回]
- [第149回]
- [第150回]
- [第001回]
- [第002回]
- [第003回]
- [第004回]
- [第005回]
- [第006回]
- [第007回]
- [第008回]
- [第009回]
- [第010回]
- [第011回]
- [第012回]
- [第013回]
- [第014回]
- [第015回]
- [第016回]
- [第017回]
- [第018回]
- [第019回]
- [第020回]
- [第021回]
- [第022回]
- [第023回]
- [第024回]
- [第025回]
- [第026回]
- [第027回]
- [第028回]
- [第029回]
- [第030回]
- [第031回]
- [第032回]
- [第033回]
- [第034回]
- [第035回]
- [第036回]
- [第037回]
- [第038回]
- [第039回]
- [第040回]
- [第041回]
- [第042回]
- [第043回]
- [第044回]
- [第045回]
- [第046回]
- [第047回]
- [第048回]
- [第049回]
- [第050回]
- [第051回]
- [第052回]
- [第053回]
- [第054回]
- [第055回]
- [第056回]
- [第057回]
- [第058回]
- [第059回]
- [第060回]
- [第061回]
- [第062回]
- [第063回]
- [第064回]
- [第065回]
- [第066回]
- [第067回]
- [第068回]
- [第069回]
- [第070回]
- [第071回]
- [第072回]
- [第073回]
- [第074回]
- [第075回]
- [第076回]
- [第077回]
- [第078回]
- [第079回]
- [第080回]
- [第081回]
- [第082回]
- [第083回]
- [第084回]
- [第085回]
- [第086回]
- [第087回]
- [第088回]
- [第089回]
- [第090回]
- [第091回]
- [第092回]
- [第093回]
- [第094回]
- [第095回]
- [第096回]
- [第097回]
- [第098回]
- [第099回]
- [第100回]
- [第101回]
- [第102回]
- [第103回]
- [第104回]
- [第105回]
- [第106回]
- [第107回]
- [第108回]
- [第109回]
- [第110回]
- [第111回]
- [第112回]
- [第113回]
- [第114回]
- [第115回]
- [第116回]
- [第117回]
- [第118回]
- [第119回]
- [第120回]
- [第121回]
- [第122回]
- [第123回]
- [第124回]
- [第125回]
- [第126回]
- [第127回]
- [第128回]
- [第129回]
- [第130回]
- [第131回]
- [第132回]
- [第133回]
- [第134回]
- [第135回]
- [第136回]
- [第137回]
- [第138回]
- [第139回]
- [第140回]
- [第141回]
- [第142回]
- [第143回]
- [第144回]
- [第145回]
- [第146回]
- [第147回]
- [第148回]
- [第149回]
- [第150回]
- [第001回]
- [第002回]
- [第003回]
- [第004回]
- [第005回]
- [第006回]
- [第007回]
- [第008回]
- [第009回]
- [第010回]
- [第011回]
- [第012回]
- [第013回]
- [第014回]
- [第015回]
- [第016回]
- [第017回]
- [第018回]
- [第019回]
- [第020回]
- [第021回]
- [第022回]
- [第023回]
- [第024回]
- [第025回]
- [第026回]
- [第027回]
- [第028回]
- [第029回]
- [第030回]
- [第031回]
- [第032回]
- [第033回]
- [第034回]
- [第035回]
- [第036回]
- [第037回]
- [第038回]
- [第039回]
- [第040回]
- [第041回]
- [第042回]
- [第043回]
- [第044回]
- [第045回]
- [第046回]
- [第047回]
- [第048回]
- [第049回]
- [第050回]
- [第051回]
- [第052回]
- [第053回]
- [第054回]
- [第055回]
- [第056回]
- [第057回]
- [第058回]
- [第059回]
- [第060回]
- [第061回]
- [第062回]
- [第063回]
- [第064回]
- [第065回]
- [第066回]
- [第067回]
- [第068回]
- [第069回]
- [第070回]
- [第071回]
- [第072回]
- [第073回]
- [第074回]
- [第075回]
- [第076回]
- [第077回]
- [第078回]
- [第079回]
- [第080回]
- [第081回]
- [第082回]
- [第083回]
- [第084回]
- [第085回]
- [第086回]
- [第087回]
- [第088回]
- [第089回]
- [第090回]
- [第091回]
- [第092回]
- [第093回]
- [第094回]
- [第095回]
- [第096回]
- [第097回]
- [第098回]
- [第099回]
- [第100回]
- [第101回]
- [第102回]
- [第103回]
- [第104回]
- [第105回]
- [第106回]
- [第107回]
- [第108回]
- [第109回]
- [第110回]
- [第111回]
- [第112回]
- [第113回]
- [第114回]
- [第115回]
- [第116回]
- [第117回]
- [第118回]
- [第119回]
- [第120回]
- [第121回]
- [第122回]
- [第123回]
- [第124回]
- [第125回]
- [第126回]
- [第127回]
- [第128回]
- [第129回]
- [第130回]
- [第131回]
- [第132回]
- [第133回]
- [第134回]
- [第135回]
- [第136回]
- [第137回]
- [第138回]
- [第139回]
- [第140回]
- [第141回]
- [第142回]
- [第143回]
- [第144回]
- [第145回]
- [第146回]
- [第147回]
- [第148回]
- [第149回]
- [第150回]
郑成功的活动是在国内明清王朝交替和西方殖民主义者侵略东方的时期展开的。1646年(清顺三年)秋,清兵进攻福建,隆武帝被生擒,郑成功的父亲郑芝龙,掌握隆武朝廷军权,在汉奸洪承畴的勾引下,率兵投降了清朝。郑成功反对父亲隆清,率领部下先在广东南沃岛起兵,继而挺进厦门鼓浪屿,1650年(清顺治七年)占领厦门、金门两岛。以后与清军展开不断的战斗,逐步收复了福建漳、泉地区,并控制了北至浙江舟山,南至广东潮惠的东南沿海地区。 1659年夏,郑成功率水师10余万北上,经舟山溯长江,连克瓜州、镇江等城。7月围攻南京,误中清江南总督郎廷佐的强兵计,折兵回厦门。翌年,清军分三路进攻厦门,被郑成功击退。郑成功在坚持抗清的同时,又和侵占我国领土台湾的荷兰殖民者展开长期的斗争。荷兰殖民者于1624年(明天启四年)侵占了我国的台湾,对台湾人民进行残酷的剥削和压迫,并不断骚扰福建、广东沿海地区,激起中国人民的无比愤慨。1652年(清顺治九年),台湾爆发了以郭怀一(郑成功父亲郑芝龙的旧部)领导的抗荷武装起义。1655年(清顺治十二年),郑成功为了抗议荷兰殖民者在海上的掳掠,曾下令禁止商船到台湾贸易,在经济上给荷兰殖民者以有力的打击。 1661年4月,郑成功令长子郑经防守厦门,新率战舰120艘,将士25000余人,在金门料罗湾誓师东进收复台湾。经过激烈的海战,郑军击沉荷 军主力舰“赫克托”号,收复了“赤嵌楼”。在近一年的争夺中,荷军伤亡近2000人,损失惨重。1662年2月1日,荷兰侵略军被迫投降,被侵占达38年之久的台湾终于重归祖国怀抱。郑成功于1662年旧历五月初八因病逝世于台湾,终年39岁。
copyright © 5ips.net all rights reserved. 版权所有:我爱评书网 站长qq:456301
如本站资源侵犯您的权利请告知,本站将立即予以删除。请试听后去购买正版光盘,其版权归相关影音公司所有.
辽icp备06012848号
如本站资源侵犯您的权利请告知,本站将立即予以删除。请试听后去购买正版光盘,其版权归相关影音公司所有.
辽icp备06012848号
